दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में पर्यावरणीय स्थिरता पर युवाओं ने रखे नवाचारपूर्ण सुझाव
Delhi's India International Centre
डायकी एक्सिस कंपनी ने 15 में से 3 छात्रों का किया चयन
कंपनी की ओर से पर्यावरण संबंधी अध्ययन करेंगे तीनों जापान
नई दिल्ली/फरीदाबाद। दयाराम वशिष्ठ: Delhi's India International Centre: राजधानी दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) के सेमिनार हॉल में आयोजित कार्यक्रम में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए 15 छात्र-छात्राओं ने "Innovative Solutions for Environmental Sustainability" विषय पर अपने अभिनव विचार, सुझाव और समाधान प्रस्तुत किए। इनमें से तीन छात्रों का जापान में पर्यावरण संबंधी अध्ययन के लिए चयन किया गया। चुने गए विद्यार्थियों को कपनी की ओर से उत्कृष्ट पुरस्कार देकर सम्मानित किया।
पलवल में पृथला स्थित जापान की कंपनी दायकी एक्सिस इंडिया, जो पैकेज्ड विकेंद्रीकृत एसटीपी के क्षेत्र में अग्रणीय कंपनी है, की ओर से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने, नवाचार आधारित समाधान विकसित करने तथा जिम्मेदार नेतृत्वकर्ता बनने के लिए प्रेरित करना है, ताकि वे स्वच्छ, सशक्त और विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दे सकें।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मुख्यतिथि के रूप में जापान की कंपनी एक्सिस दायकी के प्रेसिडेंट हिरोकी ओगामे ने शिरकत की। इस मौके पर दायकी एक्सेज कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर रायो वाजा व सीईओ डायरेक्टर कमल तिवारी के अलावा कई साइंटिस्ट भी मौजूद रहे। शुरुआत में कंपनी के सीईओ कमल तिवारी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कम्पनी की ओर से शुरू किए गए डायल 2025-2026 के बारे में अवगत कराया।
दायकी एक्सिस कंपनी के प्रबंधक निदेशक के सी पांडे ने बताया कि इस कार्यक्रम के तरह के देशभर के विश्वविद्यालयों के लगभग 300 छात्र छात्राओं से आवेदन प्राप्त हुए। अंतिम चरण के लिए आज 15 फाइनलिस्ट टीमों को दिल्ली के इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया। छात्रों का फाइनल चयन करने के लिए जजों की एक टीम गठित की गई, जिसमें आईएएस रिटायर्ड जीपी उपाध्याय व दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर दिव्या अग्रवाल को शामिल किया गया। चुने गए विद्यार्थियों को कंपनी के सीईओ व अन्य अधिकारियों ने अवार्ड देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम की खास बात रही कि इसमें कई छात्र ऐसे भी थे, जो इस समय पर्यावरण के क्षेत्र में पीएचडी कर रहे हैं। प्रतिभागियों ने जल संरक्षण, जैव विविधता के संरक्षण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक प्रदूषण पर नियंत्रण, स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग, कार्बन उत्सर्जन में कमी तथा जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए व्यावहारिक और तकनीक आधारित सुझाव दिए। छात्रों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक और विशेष रूप से युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही सतत विकास के लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
इन तीन विद्यार्थियों का हुआ चयन
पर्यावरणीय स्थिरता प्रतियोगिता में लक्ष्मी चैतन्य रेड्डी बोगाला ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बाजी मारकर प्रथम स्थान किया हासिल
आंध्र प्रदेश के रहने वाले लक्ष्मी ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से जुड़े अपने नवाचारपूर्ण एवं व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए, जिन्हें निर्णायक मंडल ने सर्वश्रेष्ठ माना। उनकी इस उपलब्धि से SIIB, पुणे और आंध्र प्रदेश का नाम रोशन हुआ।

इसी तरह आईआईटी रुड़की के यासिर हमीद ने पर्यावरणीय स्थिरता प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल किया। उन्होंने अपने प्रस्तुतीकरण में विकेंद्रीकृत अपशिष्ट जल (Wastewater) प्रबंधन, Johkasou तकनीक, जल पुनः उपयोग (Water Reuse) और हाइब्रिड गवर्नेंस मॉडल को पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी समाधान बताया।
यासिर ने अपने शोध में बताया कि Johkasou आधारित मॉडल से जल संरक्षण, अपशिष्ट जल का बेहतर प्रबंधन और टैंकरों पर निर्भरता कम की जा सकती है। उनके नवाचारपूर्ण एवं व्यावहारिक विचारों को निर्णायक मंडल ने सराहा।

आईआईटी मंडी के एमबीए छात्र अमन पांचौरी ने पर्यावरणीय स्थिरता प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल किया। ग्वालियर निवासी अमन ने पारदर्शी निगरानी (Transparent Monitoring), विकेंद्रीकृत जल शोधन (Decentralized Treatment) और प्रदर्शन-आधारित जल प्रबंधन मॉडल पर आधारित अभिनव समाधान प्रस्तुत किया।

अपने प्रस्तुतीकरण में अमन ने बताया कि आधुनिक तकनीक, पारदर्शी मॉनिटरिंग और विकेंद्रीकृत जल शोधन प्रणाली के माध्यम से स्वच्छ जल उपलब्धता को बेहतर बनाया जा सकता है। उनके व्यावहारिक एवं प्रभावशाली विचारों को निर्णायक मंडल ने काफी सराहा। देशभर से चुने गए 15 फाइनलिस्ट के बीच उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए उन्होंने तीसरा स्थान हासिल कर आईआईटी मंडी और ग्वालियर का नाम रोशन किया।